soch

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Saturday, February 18, 2012

तुम आओगी ना .............?

मंजूर है मुझे
ये जिन्दगी तुम्हारे बिना 
क्योकि ...........
कुछ कमिया थी मुझ में
कुछ गलतिया की मैंने
वादा करता हु तुमसे 
कोशिश करुगा खुश रहने की
तुम्हारे बिना
पर तुम भी करो एक वादा
लोगी जनम दुबारा मेरे लिए 
बनोगी मेरी जन्मो जन्मो के लिए 
मेरी........................ सिर्फ मेरी
तुम आओगी ना .............?   

Tuesday, February 14, 2012

दर्द की साजिश

एक होड़ से लग गयी थी 
दर्द और मेरे प्यार में 
एक समय था जब प्यार मेरे सबसे करीब था 
और दर्द बिलकुल भी नहीं
ये बात दर्द को नागवार गुजरी 
उसने रची एक साजिश 
दर्द बहुत नफरत करता था मेरे प्यार से
और मोहरा बना मैं
हुआ ऐसा कुछ 
इस दर्द ने धीरे धीरे मेरे प्यार को मुझसे
कर दिया दूर
और खुद आ गया मेरे इतने नजदीक
की मुझे पता भी नहीं चला
दर्द जीत गया
हार गया प्यार
हार गया मैं
और आज वो समय है
जब दर्द से ही है मुझे प्यार
ये दर्द कम्भखत हम दोनों के तो करीब आ गया
और हमे कर दिया एक दुसरे से दूर 
अजीब साजिश 

Thursday, February 2, 2012

तरसती आँखे

न दर्द रुकता है 
न वक़्त गुजरता है 
न आसू  आते है
न नमी सूक्ति है
न ख्वाब बदलते है
न ख्वाब टूटते है 
सब कुछ मिल तो गया है
फिर भी आँख तरसती है
जो चेहरा  नहीं है कही भी
बस उसे दुंद्ती है
खुद ही उलझाई है राहे अपनी 
खुद ही बना हु तमाशा 
अगर बदल गए है सब
मैं क्यों नहीं बदल जाता
न वो याद करते है
न मुझसे भुला जाता 

   

Wednesday, February 1, 2012

टाइटल रहित

देखा उन्हें इतेफाक से आज
उन्होंने भी देखा 
पर कर दिया अनदेखा 
थी मुस्कराहट उनके चहरे पर
देख उनकी  मुस्कराहट 
तबियत हुई मेरी खुश 
तभी महसूस हुआ कुछ
वो कर रहे है गुफ्तगू किसी और से
वो भी फ़ोन से
तब याद आया कुछ
ये वही खुशी और मुस्कराहट है 
जो कभी आती थी हम्हे देख  कर

  

Saturday, January 28, 2012

अभी तक जिन्दा हु मैं

मेरी जिन्दगी का सबसे बड़ा झूठ
सबसे बड़ा मजाक
सबसे बड़ा दर्द
सबसे बुरा सपना
सबसे मुश्किल काम
सबके लिए समस्या
ये है की ..............

"अभी तक जिन्दा हु मैं " 

बस इंतज़ार है

उसको थी पसंद शानो शोकत 
मुझे लगा शायद है वोह मेरी सादगी पे मरती
उसको थी पसंद दौलत पैसा
मुझे लगा उसे सिर्फ चहिये मेरे जैसा 
उसको थी आती बाते बनानी 
मुझे लगा वोह कहती है दिल की
वोह तब भी जी सकती थी मेरे बिना
मुझे लगा वो अब भी करती है याद मुझे 
जो जो उसने मुझे
दिखाया
समझाया
बतलाया
दर्शाया
वो सब कुछ क्या सिर्फ झूठ था 
हाँ  या ना
मुझे लगा वोह सच कहती है 
आज कही नहीं है वो
मुझे लगता है यही कही है 
उसका कहना 
मेरा समझना
आज भी उलझा हु इन सब सवालो में 
शायद उलझा भी रहू जब तक की
वो आ ना जाये 
समझा ना जाये
अब तो बस इंतज़ार है की
पहले वो आते है या आखिरी सांस 

Monday, December 26, 2011

तुम तो मेरे अपने थे

बहुत शिकवे है गैरो से हमें ...
पर तुम तो मेरे अपने  थे 
बहुत सहे इल्जाम गैरो से हमने 
पर तुम तो मेरे अपने थे ......
नहीं है परवाह गैरो की आज भी हमें 
पर.........................................
 तुम तो मेरे अपने थे ...