soch

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Friday, February 21, 2014

कभी मिले तुम्हे वो कम्बख्त तो कहना उससे ए " समंदर "
के निशां बाकी है अभी " जो जख्म तूने दिए "
सुन तो जरा ए नदी ....
तेरा रास्ता कोई और है
तेरा हमसफ़र भी कोई और है ..
तू तलाशती फिरे किसे ?
तेरे दिल में भी एक शोर है
" समंदर " से निकल कर तू चल तो पड़ी
तुझे जाना न जाने किस और है ..
तुझे मंजिलो की तलाश है
उसे इंतज़ार बस तेरा   

Sunday, October 27, 2013

तुम भी तो आज तुम नहीं
हम भी तो आज हम नहीं
अब ना ख़ुशी की है ख़ुशी
गम का भी आज गम नहीं
ये तो नहीं के गम नहीं
हाँ मेरी आँख नम नहीं
..............चित्रा
ना तुम आते ना कोई पैगाम
क्या में इसे समझू
आखिरी सलाम ???
कहते है वक़्त हर दर्द की दवा है
कम्भख्त यहाँ बेअसर क्यों हो गया
जानता हु मज़बूरी तेरी
पर मुझसे यु चेहरा तो ना छुपा
ना कर मुझसे बात चाहे
इन नजरो को तो ना तरसा
देखो ...दरवाजे पर दस्तक किसकी है
अगर इश्क हुआ तो कहना .....अब
यहाँ कोई... "दिल" ...नही रहता