soch

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Saturday, February 22, 2014

जिन्दा है कसम से चाहे नब्ज टटोल लो ....
ये सजा ए इशक़ है " समंदर "
बदनसीबो को ही नसीब होती है

1 comment:

रश्मि प्रभा... said...

http://bulletinofblog.blogspot.in/2014/06/blog-post_19.html