soch

soch

Friday, May 6, 2011

मर्ज..........

ये मर्ज है ऐसा , जिसकी दवा न कोई 
इक दर्द है ऐसा  , जिसके सिवा न कोई 
मिल जाये अगर जन्नत है आगोश में
न मिले तो ऐसा नरक न कोई 
सबसे प्यार की उम्मीद न करो यारो
निभेगी न किसी से , न मिलेगा कोई 
करती है आबाद और बर्बाद भी
जब चला नजरो का तीर , तो बचा न कोई 

3 comments:

संजय भास्कर said...

ला-जवाब" जबर्दस्त!!

रश्मि प्रभा... said...

सबसे प्यार की उम्मीद न करो यारो
निभेगी न किसी से , न मिलेगा कोई
bahut sahi

vipin sethi said...

शुक्रिया संजय जी , रश्मि जी