soch

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Saturday, January 28, 2012

बस इंतज़ार है

उसको थी पसंद शानो शोकत 
मुझे लगा शायद है वोह मेरी सादगी पे मरती
उसको थी पसंद दौलत पैसा
मुझे लगा उसे सिर्फ चहिये मेरे जैसा 
उसको थी आती बाते बनानी 
मुझे लगा वोह कहती है दिल की
वोह तब भी जी सकती थी मेरे बिना
मुझे लगा वो अब भी करती है याद मुझे 
जो जो उसने मुझे
दिखाया
समझाया
बतलाया
दर्शाया
वो सब कुछ क्या सिर्फ झूठ था 
हाँ  या ना
मुझे लगा वोह सच कहती है 
आज कही नहीं है वो
मुझे लगता है यही कही है 
उसका कहना 
मेरा समझना
आज भी उलझा हु इन सब सवालो में 
शायद उलझा भी रहू जब तक की
वो आ ना जाये 
समझा ना जाये
अब तो बस इंतज़ार है की
पहले वो आते है या आखिरी सांस 

2 comments:

Anonymous said...

:)

VIPIN said...

who is this anonymous person ?